Adhyatmik kahani आध्यात्मिक कहानियां

Tuesday, 16 August 2016

वेदों में गायत्री का गौरव

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तस्मात् अज्ञान सर्व हुतः ऋचा सामानि अज्ञिरे ।। छन्दांसि जज्ञिरे तस्मात् यजुस्तस्समाद जायत ॥ (यजुः 31- 7) अर्थात् उस यज्ञ का रूप परम ब्रह...

शक्ति की अधिष्ठात्री त्रिपदा गायत्री

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संसार के समस्त दुःखों के तीन प्रधान कारण हैं- (1)अज्ञान, (2) अभाव, (3) अशक्ति ।। सत्, रज, तम, की त्रिविधि प्रकृति से मनुष्य का निर्माण ह...

गायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन प्राचीन यज्ञ

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(1) राजसूय यज्ञ– जिस सम्मेलन में सुसंगठित होकर राजा का चुनाव किया जाता है, ऐसे संगठन को राजसूय यज्ञ कहते हैं ।। इसका इसका वर्णन अथर्ववेद क...

गायत्री और ब्रह्म की एकता

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गायत्री कोई स्वतंत्र देवी- देवता नहीं है ।। यह तो परब्रह्म परमात्मा का क्रिया भाग है ।। ब्रह्म निर्विकार है, अचिन्त्य है, बुद्धि से परे है...

गायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन_

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___ नाभिपद्म भुवा विष्णेब्रह्मणानिर्मितं जगत् ।। स्थावरं जंगमं शक्त्या गायत्र्या एवं वै ध्रुवम॥ (विष्णोः) विष्णु की (नाभिपद्म भुवा) नाभि...

| गायत्री महाविद्या ||

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गायत्री साधना सदबुद्धि की आराधना- उपासना है ।। “गौ” को वेदों की माता- वेदमाता कहा जाता है ।। वेद शब्द का अर्थ है ”ज्ञान” ।। यह ज्ञान कल्या...

मह र्षि भारद्वाज रचित ‘विमान शास्त्र‘ 5

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4. यन्त्र सर्वस्वः – यह ग्रन्थ भी ऋषि भारदूज रचित है। इस के 40 भाग हैं जिन में से एक भाग ‘विमानिका प्रकरण’के आठ अध्याय, लगभग 100 विषय और ...
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